पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया है। AIMIM ने अपने X पर पोस्ट किया है, हुमायूं कबीर के खुलासों से यह जाहिर हो गया है कि बंगाल के मुसलमान कितने कमजोर हैं। AIMIM ऐसे किसी भी बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे। आज की तारीख में, AIMIM ने कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ लिया है।
'स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे चुनाव, किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं'
पोस्ट में आगे लिखा गया है, ''बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब, उपेक्षित और शोषित समुदायों में से एक हैं। दशकों तक धर्मनिरपेक्ष शासन रहने के बावजूद, उनके लिए कुछ भी नहीं किया गया है। किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने के पीछे AIMIM की नीति यह है कि हाशिए पर पड़े समुदायों की अपनी एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज हो। हम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं होगा।''
गठबंधन तोड़ने की वजह क्या?
बताया जा रहा है कि हुमायूं कबीर के खिलाफ कल 9 अप्रैल को तृणमूल का वीडियो जारी होने के बाद गठबंधन को लेकर शक पैदा हो गया था। जिसके बाद ओवैसी की AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया। ओवैसी कल बंगाल आ रहे थे लेकिन फिर उनका दौरा रद्द हो गया।
टीएमसी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें कथित तौर पर हुमायूं कबीर 1000 करोड़ की डील की बात कर रहे हैं। इस वीडियो में हुमायूं कबीर किसी से कह रहे हैं, हजार करोड़ रुपये आएंगे। बाबरी मस्जिद बनेगी या नहीं, ये छोड़ो। मुसलमान बहुत भोले हैं, उन्हें बेवकूफ बनाना आसान है। हालांकि हुमायूं कबीर ने इस वीडियो को फर्जी और AI जेनरेटेड बताया है।
हुमायूं कबीर ने ओवैसी को बताया था अपना ‘बड़ा भाई’
बता दें कि इससे पहले 25 मार्च को आम जनता उन्नयन पार्टी के चीफ हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के संग अपने गठबंधन की घोषणा की थी। हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा था कि यह अलायंस पश्चिम बंगाल में एक मजबूत तीसरा ऑप्शन पेश करेगा। हुमायूं का दावा था कि यह गठबंधन उन वर्गों की आवाज बन जाएगा, जो मुख्यधारा की सियासत से खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं।
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